Life like संगीत

बचपन ही से सुरों ने, कुछ एैसा संगीत है रचा, मासूमियत को ताक पे रक्खा, लड़कपन तक वो भी ना बचा, हरकतें नायब थी उन धुनों की, जवानी उस्ताद थी उन गुरों की, मूर्कियों ने अंजाने सुरों को मिलाया, हमने भी बदनामी से नाम कमाया, अब कड़ीयाँ कुछ इस क़दर जुड़ि हैं, मानो सारी राहेंContinue reading “Life like संगीत”

हम बच्चे हैं

जब तक हम बच्चे हैं, कहीं कहीं तो सच्चे हैं, चाहे अनुभव में कच्चे हैं, पर भावना में सच्चे हैं, और बहुतों से अच्छे हैं, लोगों को लगते फच्चे हैं!

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